अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल की कीमतों में इस उछाल से भारत की चिंता बढ़ सकती है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है। इससे रुपये और महंगाई पर भी असर पड़ने की संभावना रहती है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू ईंधन की कीमतें कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करती हैं। तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों और अन्य लागतों को ध्यान में रखकर कीमतों का निर्धारण करती हैं। अमेरिका-ईरान तनाव लंबे समय तक रहने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। इससे भारत के लिए ईंधन लागत और महंगाई को लेकर जोखिम बढ़ेगा। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि कच्चे तेल की कीमतें आगे किस स्तर पर टिकती हैं। Source: Source Post navigation मजबूत आवासीय मांग से बढ़ी जमीन की खरीद, 2021 से 2026 तक 7,700 एकड़ से ज्यादा भूमि का सौदा EPFO का नया PF एडवांस नियम: बीमारी, पढ़ाई और शादी के लिए कितनी बार निकाल सकेंगे पैसा? जानें पूरी डिटेल