दुनिया में चल रहे संघर्षों ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और स्पष्ट किया है। ईरान और यूक्रेन जैसे देशों ने घरेलू उत्पादन क्षमता के जरिए अपनी मजबूती दिखाई है। इन उदाहरणों से रणनीतिक स्वतंत्रता के महत्व को समझा जा सकता है। भारत भी स्वदेशी रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने पर लगातार ध्यान दे रहा है। देश में मिसाइल, विमान और नौसैनिक प्रणालियों के विकास पर जोर दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर रक्षा नीति का उद्देश्य बाहरी निर्भरता कम करना है। आधुनिक युद्धों में तकनीक और घरेलू संसाधनों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत अपनी जरूरतों के अनुसार रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस रणनीति से सुरक्षा के साथ आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन से निर्यात की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक मजबूत घरेलू रक्षा उद्योग देश की रणनीतिक क्षमता को बढ़ाता है। वैश्विक परिस्थितियों के बीच आत्मनिर्भरता भारत की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बन गई है।

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