भारत की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) संबंधी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मजबूत फाइबर नेटवर्क की आवश्यकता है। बढ़ती डेटा मांग को संभालने के लिए उच्च क्षमता वाली डिजिटल अवसंरचना विकसित करना अनिवार्य माना जा रहा है। भारत विनिर्माण क्षेत्र में अग्रणी है, लेकिन घरेलू स्तर पर फाइबर नेटवर्क के विस्तार में अभी और सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि उन्नत फाइबर तकनीकें एआई आधारित सेवाओं की रीढ़ बनेंगी। हॉलो-कोर फाइबर और मल्टीकोर फाइबर जैसी नई तकनीकें डेटा ट्रांसमिशन को अधिक तेज और कुशल बनाएंगी। इन तकनीकों से बड़े पैमाने पर एआई वर्कलोड को बेहतर ढंग से संभाला जा सकेगा। इससे देशभर में डिजिटल कनेक्टिविटी की गुणवत्ता और क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा। मजबूत फाइबर नेटवर्क उद्योगों, अनुसंधान संस्थानों और डिजिटल सेवाओं को भी नई गति देगा। भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए उन्नत फाइबर अवसंरचना को रणनीतिक निवेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अत्याधुनिक फाइबर नेटवर्क का स्वामित्व भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा। यह देश को वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में अधिक सक्षम और आत्मविश्वासी बनाएगा। Source: Source Post navigation मेमोरी चिप की वैश्विक कमी के बीच भी 50% वृद्धि का लक्ष्य, लावा को दिख रहा बड़ा अवसर Kia Syros EV बनाम Tata Nexon EV: रेंज, फीचर्स और तकनीक के मामले में कौन आगे