कबीरधाम पुलिस ने अपराध जांच को आधुनिक तकनीक से मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। अब केवल गवाहों के बयान पर निर्भर रहने के बजाय वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच की जाएगी। पुलिस ने नेफीस (नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) और मोबाइल क्राइम यूनिट के इस्तेमाल की ट्रेनिंग अधिकारियों और जवानों को दी है। इस तकनीक से घटनास्थल पर मिले फिंगरप्रिंट के आधार पर अपराधियों की पहचान की जा सकेगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्य अदालत में मजबूत प्रमाण साबित होते हैं। फिंगरप्रिंट, डीएनए और अन्य फॉरेंसिक रिपोर्ट आरोपी से मेल खाने पर गवाहों के मुकरने से केस कमजोर नहीं होगा। पहले कई मामलों में पुलिस को गवाहों और पूछताछ पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता था। नई व्यवस्था में घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां से सभी वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने पर जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार नेफीस में दर्ज पुराने रिकॉर्ड के आधार पर किसी भी राज्य के आरोपी की पहचान की जा सकती है। चोरी, हत्या और अन्य गंभीर अपराधों में यह तकनीक जांच प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाएगी। कबीरधाम पुलिस का लक्ष्य आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से अपराधियों तक जल्द पहुंचना और मजबूत केस तैयार करना है।

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