करनाल जिले में सामने आए करीब 35 करोड़ रुपये के धान घोटाले की जांच में एसआईटी ने कार्रवाई तेज कर दी है। जांच में फर्जी गेटपास, स्टॉक में कमी और मिलीभगत के जरिए सरकारी धान के गबन का खुलासा हुआ है। मामले में कई आढ़ती, मिलर और विभागीय अधिकारियों पर शिकंजा कसा गया है। जांच के दौरान 2.47 करोड़ रुपये की बड़ी रिकवरी भी की गई है। एक मिल मालिक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। निरीक्षक की गिरफ्तारी के बाद घोटाले में अधिकारियों की भूमिका की परतें खुलने लगी हैं। तरावड़ी और करनाल मंडियों में फर्जी गेटपास के जरिए धान की हेराफेरी का मामला सामने आया है। स्टॉक जांच में रिकॉर्ड और वास्तविक मात्रा में भारी अंतर पाया गया है। इस मामले में कई अधिकारियों पर केस दर्ज और कुछ पर कार्रवाई की गई है। एसआईटी के अनुसार जांच अभी जारी है और आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यह घोटाला सरकारी खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं को उजागर करता है।

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