कर्नाटक के परिवहन मंत्री बायरथी सुरेश को सार्वजनिक परिवहन की वास्तविक स्थिति का अनुभव हुआ। उन्होंने शहर की बस सेवाओं का निरीक्षण करने के लिए आम यात्री की तरह सफर किया। गुप्त निरीक्षण के दौरान बस कंडक्टर ने उनसे छुट्टे पैसे नहीं होने पर उतरने को कहा। मंत्री ने यात्रियों को होने वाली परेशानियों को खुद महसूस किया। इसके बाद उन्हें ऑटो-रिक्शा में भी अधिक किराया मांगने की स्थिति का सामना करना पड़ा। ऑटो चालक ने सामान्य किराए से ज्यादा रकम की मांग की। मंत्री ने बिना पहचान बताए परिवहन व्यवस्था की कमियों को समझने की कोशिश की। इस निरीक्षण का उद्देश्य यात्रियों की समस्याओं को सीधे जानना था। घटनाओं के बाद सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में सुधार को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मंत्री ने आम लोगों को होने वाली दिक्कतों को करीब से देखा। इस तरह के निरीक्षण से व्यवस्था में सुधार के लिए कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

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