काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय विमानक्षेत्र पर इस्तांबुल से आ रहे एक विमान के लैंडिंग के दौरान पहियों में आग लग गई। यह घटना शुक्रवार की सुबह लगभग 9 बजे घटी, जब विमान में 277 यात्री और 12 कर्मचारी सवार थे। आग लगने के तुरंत बाद ही पायलट ने इमरजेंसी प्रोटोकॉल चालू किए, जिससे सभी यात्रियों को 15 मिनट के भीतर सुरक्षित निकाला गया। एयरपोर्ट पर लैंडिंग और टेकऑफ की प्रक्रिया लगभग आधे घंटे के लिए अस्त-व्यस्त हुई।

काठमांडू एयरपोर्ट एक पर्वतीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण लैंडिंग में चुनौतियाँ आम हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यहाँ की ऊंचाई और मौसमी अस्थिरता के कारण विमान के ब्रेक सिस्टम में गर्मी जमा होने का खतरा रहता है। इस घटना में विमान की ब्रेक परिणामस्वरूप आग लगी, जिसे फायर ब्रिगेड ने 8 मिनट में नियंत्रित कर लिया। एयरपोर्ट प्रशासन ने बताया कि यह दुर्घटना विमान के टेकऑफ से पहले आई थी, जिससे बड़े पैमाने पर दुर्घटना की संभावना को रोका गया।

एयरपोर्ट अधिकारियों ने बताया कि यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फायर ब्रिगेड ने तुरंत कार्रवाई की। टर्मिनल के एक अधिकारी ने कहा, ‘हमारे नियमित इमरजेंसी ट्रेनिंग के कारण चालक दल और सुरक्षा टीम ने बेहद तेजी से प्रतिक्रिया की।’ इस घटना के बाद विमान कंपनी ने अपने सभी उड़ानों की सुरक्षा जांच का आदेश दिया। एयरपोर्ट पर इस दुर्घटना के कारण 15 से अधिक उड़ानें लेट हुईं, जिससे यात्रियों में असुविधा हुई।

इस घटना से विमानन सुरक्षा मानकों पर नजर बढ़ी है। नेपाल वायु सुरक्षा अधिकारियों ने आगे कहा कि वे विमानों की नियमित रखरखाव जांच की प्रक्रिया को मजबूत करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे आने वाले महीनों में नेपाली विमानन क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी नियमों में और विस्तार किया जाएगा। इस घटना ने विश्व भर के विमानन ऑपरेटर्स को भी सचेत कर दिया है कि भूमि सुरक्षा प्रक्रियाओं को नियमित रूप से अपडेट करना आवश्यक है।