भारत की कुछ NHS ट्रस्ट से आए अंकों के अनुसार, एक साल में रेसिम की शिकायतें 17% बढ़ गई है। इन दिनों स्वरूप के कारण डॉक्टर पर हमला करने वाले महसूस करने वाले एडमिट्स की संख्या बढ़ गई है। इसकी शुरुआत सिख आया कि एक पहले से रेसिम का दबाव लेने वाला डॉक्टर मुंह तय करने वाले होते हैं। अधिकांश शिकायतें स्थानीय संस्थाओं से आई हैं, परंतु केंद्रीय संस्थाएँ मेहनत कर रही हैं। अधिकांश डॉक्टरों ने कहा कि वे बचपन से प्रतिबद्ध हैं, लेकिन यह अब मुश्किल रह गया। इसकी कारण डॉक्टरों में दावदार प्रतिबद्धता भी जमा हुई है। आंकड़े दर्शाते हैं कि इन खतरों से डॉक्टरों में फ्यूजन और बल भी जुटा रहा है। प्राथमिक संस्थाएँ इस मुश्किल चुनौती के साथ घबराहट को दूर करने के लिए अपनी भूमिका संदर्भित कर रही हैं। यह आचरण की व्यापक रेशेदारी को बढ़ावा देने की मुख्य प्रयास है। 🔗 Read original source — BBC News Post navigation पाकिस्तान एक रेहबियलेशन सेंटर पर हवाई ठहराव की चालू बजाय और 269 अफगानों का मारे। उनके परिवार ने इसके कारण जाने चाहिए क्यों शिकायत की है लेब्रोन जैम्स के भविष्य अस्पष्ट: थंडर की हार के बाद लैक्सरी पेलोजी में उनका आखिरी मौका?