केरल में पंद्रह अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेसी‑उद्‍फ़ (UDF) ने 140 में से 102 सीटें जीत कर सत्ता में लौट आया। भाजपा‑जनता गठबंधन (NDA) को केवल 31 सीटें मिलीं, जबकि अल्पसंख्यक समुदायों के समर्थन से कामगार संवाद (LDF) को 73 सीटें मिलीं। कांग्रेसी सशक्त नेता पेडी राजन ने गठबंधन को जीत दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई, पर जीत के बाद मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेसी भीतर तनाव स्पष्ट हो गया है। प्रमुख कांग्रेसी नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री वी रमेश ने अपने पक्ष का समर्थन जताया, जबकि कई युवा कांग्रेसी अनुयायियों ने पी.जी. निकेश के नेतृत्व में बदलते नेतृत्व की माँग की। पार्टी के भीतर अध्यक्षीय दावों, गठबंधन में भागीदारी और व्यक्तिगत मुनाफे के सवालों से चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री चयन में कांग्रेसी‑उद्‍फ़ के भीतर समझौता होना जरूरी होगा, ताकि गठबंधन की स्थिरता बनी रहे और राज्य के विकास कार्यों में निरंतरता बनी रहे। इस दौरान, जनता ने विकास, रोजगार और स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिकता के रूप में उजागर किया, जिससे आगामी मुख्यमंत्री के लिए जनता की अपेक्षाएँ स्पष्ट हो गई हैं।