कैप्टन शिवा चौहान ने सियाचिन ग्लेशियर में तैनात होने वाली पहली महिला सेना अधिकारी बनकर इतिहास रचा। उन्होंने व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना करते हुए सैन्य प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कम उम्र में पिता को खोने के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। उनकी इंजीनियरिंग डिग्री ने कठिन सैन्य जिम्मेदारियों को निभाने में मदद की। कुमार पोस्ट पर उनकी तैनाती बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई। कैप्टन शिवा चौहान ने अपनी क्षमता और दृढ़ संकल्प से नई मिसाल कायम की। उन्होंने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण साइकिल अभियान का नेतृत्व भी किया। उनकी उपलब्धियां भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाती हैं। उनकी यात्रा देश की कई युवतियों को सैन्य सेवा के लिए प्रेरित करती है। कैप्टन शिवा चौहान की कहानी साहस, मेहनत और समर्पण का उदाहरण है। Source: Source Post navigation वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित बैंकिंग और UPI इस्तेमाल की दी गई जानकारी, साइबर ठगी से बचाव पर जोर सरकार नर्सिंग संस्थानों को करेगी आधुनिक, बीएनआरसी को भी मिलेगा और अधिक सशक्त स्वरूप