मध्य प्रदेश के सुरेंद्र सिंह चौधरी को लोग प्यार से बिट्टू तबाही कहते हैं। उन्होंने अजनार नदी की सफाई का जिम्मा खुद उठाया। नदी में बढ़ते प्रदूषण को देखकर उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर पहल करने का फैसला किया। उन्होंने अपने संसाधनों और मेहनत से नदी की सफाई शुरू की। उनका प्रयास पर्यावरण संरक्षण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी का उदाहरण बन गया है। अक्सर लोग सार्वजनिक समस्याओं के समाधान की जिम्मेदारी दूसरों पर छोड़ देते हैं। ‘कोई और साफ कर देगा’ जैसी सोच सामूहिक निष्क्रियता को बढ़ावा दे सकती है। बिट्टू तबाही ने इस मानसिकता के उलट खुद कदम उठाकर बदलाव की शुरुआत की। उनकी पहल बताती है कि छोटे स्तर पर किया गया व्यक्तिगत प्रयास भी असर पैदा कर सकता है। नदी की सफाई के जरिए उन्होंने लोगों का ध्यान पर्यावरण प्रदूषण की समस्या की ओर खींचा। उनका अभियान सामूहिक जिम्मेदारी के साथ व्यक्तिगत जवाबदेही की जरूरत भी सामने रखता है। ऐसी पहल दूसरे लोगों को भी अपने आसपास के पर्यावरण के लिए सक्रिय होने के लिए प्रेरित कर सकती है। अजनार नदी की सफाई का उनका प्रयास प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और नागरिक भागीदारी की मिसाल बन रहा है। Source: Source Post navigation Gen Z की नई प्राथमिकता: नौकरी की सुरक्षा के साथ वर्क-लाइफ बैलेंस भी जरूरी EV Battery Care: चार्जिंग के दौरान न करें ये 5 गलतियां, वरना बैटरी को हो सकता है बड़ा नुकसान