निवेशकों और खरीदारों के लिए सबसे बड़ी सलाह यही है कि वे किसी भी मार्केटिंग स्ट्रेटजी या भारी डिस्काउंट के पीछे न भागें. निवेश से पहले बिल्डर की हिस्ट्री, पुराने प्रोजेक्ट्स की डिलीवरी और उस क्षेत्र के भविष्य के विकास की ‘ड्यू डिलिजेंस’ यानी जांच-परख स्वयं करें.