पिछले कुछ महीनों में Xbox, Nintendo Switch 2 और Valve Steam Deck जैसे लोकप्रिय गेमिंग कंसोल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में भारी उछाल आया है। तकनीकी कंपनियां इन मूल्यवृद्धियों के लिए मुख्य रूप से ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। दरसअल, AI डेटा सेंटर्स और नई तकनीकों के लिए मेमोरी चिप्स और सेमीकंडक्टर्स की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। इस अत्यधिक मांग के कारण बाजार में मेमोरी कंपोनेंट्स (RAM) की भारी कमी हो गई है, जिससे इनकी कीमतें पिछले साल की तुलना में कई गुना बढ़ गई हैं। चिप निर्माता कंपनियां अब अपना उत्पादन डेटा सेंटर्स की ओर मोड़ रही हैं, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आपूर्ति कम हो गई है। एप्पल, माइक्रोसॉफ्ट और निनटेंडो जैसी बड़ी कंपनियां अब इस बढ़ती लागत का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने को मजबूर हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘RAMageddon’ जैसी स्थिति 2027 तक बनी रह सकती है, जिससे निकट भविष्य में कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका है। इन कंपनियों का कहना है कि वे इस स्थिति को टालने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन घटती आपूर्ति के कारण मूल्य वृद्धि अनिवार्य हो गई है। यह स्थिति न केवल गेमिंग कंसोल बल्कि लैपटॉप और स्मार्टफोन बाजार को भी प्रभावित कर रही है।

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