सरगुजा अंचल में गंगा दशहरा पर्व मनाया जाता है, जो आस्था, लोक संस्कृति और जल संरक्षण का संदेश देता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को यह पर्व मनाया जाता है। ग्रामीण अपने गांव के तालाबों और जलाशयों को गंगा तुल्य मानकर पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि इस दिन गंगा मैया गांव के उन तालाबों में विराजती हैं, जहां कमल के फूल खिले रहते हैं। इस पर्व की एक और परंपरा कठपुतली विवाह है। गांव की लड़कियां और बच्चे लकड़ी के गुड्डा-गुडिय़ा का विवाह पूरे रीति-रिवाज के साथ कराते हैं। यह पर्व जल संरक्षण के महत्व को समझाता है। गंगा दशहरा पर लोग अपने घरों को सजाते हैं और गंगा मैया की पूजा करते हैं। यह पर्व लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करता है और आस्था को बढ़ावा देता है। Source: Source Post navigation छत्तीसगढ़ में चमगादड़ों की मौत छत्तीसगढ़ की प्राचीन संस्कृति का उत्खनन