गाज़ा के शरणार्थी शिविरों में तापमान में वृद्धि के साथ त्वचा रोगों की घटनाएँ तेज़ हो रही हैं, जिससे स्वास्थ्य कर्मियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। गर्मी में पसीने, घर्षण और अपर्याप्त जल उपलब्धता के कारण बर्तन, एक्जिमा और फंगल संक्रमण जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में इस कारण से रोगियों की संख्या में 30‑40 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि दवाओं और साफ‑सुथरे कपड़ों की कमी इन उपचारों को कठिन बना रही है। अंतर्राष्ट्रीय सहायता संगठनों ने त्वरित राहत के तौर पर ठंडे पानी की टैंकों और एंटी‑फंगल दवाओं की आपूर्ति शुरू की, परन्तु निरंतर सप्लाई श्रृंखला में बाधाएं बनी हुई हैं। यूएनआरएफए ने कहा है कि अगर गर्मी के महीनों में ठंडे शावर, साफ़ कपड़े और पोषण‑समृद्ध आहार नहीं उपलब्ध कराए गए तो गंभीर त्वचा संक्रमण से जटिलता और मृत्युदर बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिये शरणार्थियों को स्थायी आवास, स्वच्छ जल और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि गर्मियों में उभरने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को रोका जा सके।