अमेरिका के ग्रेट लेक्स क्षेत्र में आक्रामक सी लैम्प्रे स्थानीय मछलियों के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इन्हें ‘वैम्पायर फिश’ भी कहा जाता है क्योंकि ये अन्य मछलियों से चिपककर उनका खून और ऊतक खाते हैं। माना जाता है कि ये नहरों के माध्यम से ग्रेट लेक्स तक पहुंचे थे। इसके बाद इनकी संख्या तेजी से बढ़ी और इन्होंने स्थानीय जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचाया। हर साल ये बड़ी मात्रा में मछलियों का शिकार करते हैं। वर्ष 1957 से टीएफएम (TFM) नामक रसायन का उपयोग इनके लार्वा को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है। यह उपाय सी लैम्प्रे की आबादी कम करने में प्रभावी साबित हुआ है। हालांकि, नियंत्रण कार्यक्रमों में किसी भी प्रकार की रुकावट आने पर इनकी संख्या फिर तेजी से बढ़ जाती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नियमित प्रबंधन के बिना स्थानीय मछली प्रजातियों की सुरक्षा मुश्किल हो सकती है। ग्रेट लेक्स के जैविक संतुलन और मत्स्य संसाधनों की रक्षा के लिए इन आक्रामक जीवों का लगातार नियंत्रण आवश्यक माना जाता है। Source: Source Post navigation बर्नहम की ‘महंगाई से राहत देने वाली सरकार’ पर चर्चा, जेलेंस्की ने सेना प्रमुख को हटाया हिंसा और विरोध के माहौल के बीच क्या पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर का चुनाव निष्पक्ष हो पाएगा?