भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक और बड़ी सफलता मिली है। ISRO के चंद्रयान-2 ऑर्बिटर ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सतह के नीचे पानी की बर्फ मौजूद होने के मजबूत संकेत खोजे हैं। यह खोज बेहद ठंडे और अंधेरे क्रेटर्स में की गई है, जहां तापमान माइनस 248 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। वैज्ञानिकों ने एडवांस ड्यूल-फ्रीक्वेंसी सिंथेटिक अपर्चर रडार तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक की मदद से चंद्र सतह के नीचे छिपी वॉटर-आइस के संकेतों का पता चला। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज भविष्य के मानव अंतरिक्ष मिशनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। चांद पर मौजूद बर्फ से पीने का पानी तैयार किया जा सकेगा। इसके अलावा ऑक्सीजन और रॉकेट ईंधन बनाने में भी इसका उपयोग संभव है। इससे लंबे समय तक चंद्र मिशन चलाने में मदद मिल सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिणी ध्रुव का क्षेत्र भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान का बड़ा केंद्र बन सकता है। भारत की यह उपलब्धि वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में भी चर्चा का विषय बनी हुई है। चंद्रयान-2 की यह खोज चांद पर स्थायी मानव उपस्थिति की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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