बीजिंग ने हाल ही में एआई सेक्टर में नियामक नज़र को कड़ा किया है, क्योंकि अमेरिका के साथ तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए बीजिंग ने मेटा द्वारा भारतीय एआई स्टार्टअप की खरीद को रोकने की कोशिश की है। यह कदम चीन की रणनीतिक सुरक्षा चिंताओं को दर्शाता है, जिसमें विदेशी तकनीकी निवेश को राष्ट्रीय सुरक्षा के जोखिम के रूप में देखा जाता है। पेरोल, डेटा सुरक्षा और संभावित तकनीकी निर्भरता को लेकर चीन ने एआई कंपनियों की समीक्षात्मक जांच को तेज़ कर दिया है। इस कदम से दोनों महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा और तीव्र हो सकती है, जिससे वैश्विक टेक मार्केट में नई नीति‑निर्धारण और संरक्षणवादी उपायों की संभावना बढ़ रही है। Post navigation ईरान-यूएस वार्ता में कौन है असली खिलाड़ी? चित्रों में: किंग चार्ल्स तृतीय और क्वीन कॅमिला का अमेरिका में राज्य दौरा शुरू