गाज़ा में लगभग एक मिलियन बच्चे मानसिक स्वास्थ्य सहायता की तत्काल जरूरत में हैं। लगातार लड़ाइयों, घरों के ध्वँस, और प्रियजनों की हानि ने इन बच्चों पर गहरा आघात डाल दिया है, जिससे कई अब शब्द नहीं बोल पाते। विशेषज्ञों का कहना है कि निरंतर आतंक, विस्थापन और भोजन एवं पानी की कमी ने ‘ट्रॉमैटिक एमिक्टिसिया’ नामक स्थिती पैदा की है, जिसमें बच्चा आंतरिक रूप से शॉक्स को व्यक्त नहीं कर पाता। स्कूलों के बर्बाद होने और दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं की कमी ने उपचार को और कठिन बना दिया है। अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने तुरंत मनोवैज्ञानिक समर्थन, खेल थैरेपी और सुरक्षित शैक्षिक माहौल की माँग की है, लेकिन ख़तरों की निरंतरता इसे अधूरा छोड़ देती है। यदि इस संकट को अनदेखा किया गया तो यह पीढ़ी सामाजिक-भावनात्मक विकास में गहरी कमी का शिकार हो सकती है, जिससे भविष्य में उनका स्वयं के अधिकार और सामुदायिक पुनर्निर्माण करने का सामर्थ्य कम हो जाएगा। Post navigation रायपुर कमिश्नरेट ने ऑपरेशन ‘कालचक्र-0.2’ में 196 वारंट जारी, 5 फरार गिरफ़्तार शिक्षा में नई क्रांति: फिनलैंड के सहयोग से पंजाब में लागू होगा Train‑the‑Trainer मॉडल, CM भगवंत मान का बड़ा विजन