चार दशकों के बाद, चेरनोबिल आपदा में खुद को “लिक्विडेटर्स” कहने वाले बचे हुए सैनिक, फायरफाइटर, इंजीनियर, खनिक और चिकित्सकों ने यूक्रेन की मातृभूमि की धरती पर लौट आए। उस विनाशकारी विस्फोट के बाद लगभग 6 लाख लोग गैस, धुएँ और रेडियेशन से लड़े थे, जिनमें से कई को तत्काल या बाद में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ हुईं। अब सबसे उम्रदराज़ बची‑बची टीम, जिनकी उमर 80‑90 के दशक में पहुँच गई है, उन्हें सम्मानित किया गया, साथ ही यूक्रेनी सरकार ने स्मृति दिवस के अवसर पर विशेष समारोह आयोजित किया। लौटते हुए उन्होंने कहा कि इस यात्रा से उन्हें अपने जवान दिनों की यादें ताज़ा हुईं और यह सबको चेतावनी है कि परमाणु सुरक्षा कभी हल्की नहीं आँकी जानी चाहिए। यह सहस्मरण न केवल उन शहीदों की श्रद्धांजलि है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को ऊर्जा के सुरक्षित उपयोग के प्रति जागरूक भी करता है। Post navigation दिल्ली में पार्किंग संकट को कहा अलविदा: 5 नई मल्टीलेवल पार्किंग्स से राहत एटीएम कार्ड बदलने वाले गिरोह का बड़ा पर्दा‑फाश, 15 बैंकों के 44 कार्ड बरामद