छत्तीसगढ़ में मतांतरित आदिवासियों की डी-लिस्टिंग के मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इस विषय पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के बीच तीखी बहस देखने को मिल रही है। पूर्व मंत्री अमरजीत भगत के हालिया बयान ने विवाद को और हवा दे दी है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उनके बयान को भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि इस मुद्दे पर लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, जनजाति सुरक्षा मंच ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि धर्मांतरण कर चुके आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण लाभ की समीक्षा होनी चाहिए। मंच ने चेतावनी दी है कि जब तक मतांतरित आदिवासियों का आरक्षण समाप्त नहीं किया जाता, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। इस मुद्दे को लेकर राज्य में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। समर्थकों का तर्क है कि आरक्षण का लाभ केवल पारंपरिक जनजातीय समुदायों को मिलना चाहिए। वहीं विरोधी पक्ष इसे आदिवासी अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील विषय बता रहा है। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर अपने-अपने पक्ष को मजबूती से रख रहे हैं। आने वाले समय में यह विषय राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण मुद्दा बना रह सकता है।

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