रायपुर के सुप्रिया पांडेय की रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ सरकार ने संपत्ति रजिस्ट्री को सुदृढ़ करने के लिये दो प्रमुख कदम उठाए—पहला, सम्पूर्ण भूमि रजिस्ट्री को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लाना, और दूसरा, रजिस्ट्री प्रक्रिया में कागज़ी काम को खत्म करके एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल स्थापित करना। इन्हें लागू करने की घोषणा के बाद भी जमीन पर कई बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। तकनीकी ढाँचा तैयार नहीं होना, ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कवरेज की कमी, तथा रजिस्ट्री कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण न मिलना प्रमुख कारणों में गिनाए जा रहे हैं। साथ ही, जनता में नए सिस्टम के प्रति जागरूकता की कमी और पुराने कागज़ी रिकॉर्ड के साथ अनिश्चितता भी लागू होने में रुकावट बन रही है। सरकार ने इन खामियों को दूर करने के लिये अतिरिक्त बजट आवंटित करने और प्रशिक्षण कार्यक्रम तेज़ करने का वादा किया है, पर अभी तक इन वादों पर ठोस कार्रवाई का अभाव है। परिणामस्वरूप, दो साल बीतने के बाद भी ये अहम फैसले जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर पाए हैं। Post navigation दिल्ली मेट्रो के 32वें स्थापना दिवस पर सीएम रेखा गुप्ता का ऐलान: फेज‑V (बी) में जोड़े जाएंगे 7 नए कॉरिडोर खरगोन में हनुमान मंदिर तोड़फोड़: आरोपी की गिरफ्तारी और शांति हेतु SP की अपील