उपभोक्ता आयोग ने एक यात्री की शिकायत पर उत्तरी रेलवे को 25,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यात्री को साझा बर्थ के लिए केवल एक कंबल और एक तकिया उपलब्ध कराया गया था। इससे उसे एक अजनबी यात्री के साथ कंबल साझा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। आयोग ने माना कि यह रेलवे के अपने बेडरोल संबंधी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था। मामले में यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं में स्पष्ट कमी पाई गई। आयोग ने इसे सेवा में कमी का मामला माना। यात्री को हुई असुविधा और मानसिक परेशानी को ध्यान में रखते हुए मुआवजा देने का निर्देश दिया गया। आदेश में रेलवे से यात्रियों के लिए निर्धारित सुविधाओं का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया। आयोग ने कहा कि यात्रियों को वादा की गई सेवाएं उपलब्ध कराना रेलवे की जिम्मेदारी है। ऐसी लापरवाही से यात्रियों के अधिकार प्रभावित होते हैं। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा के महत्व को भी रेखांकित करता है। रेलवे को भविष्य में ऐसी शिकायतों से बचने के लिए आवश्यक सुधार करने की सलाह दी गई है। Source: Source Post navigation मद्रास हाईकोर्ट ने DMK विधायक वी. सेंथिलबालाजी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की नाबालिग गर्भवती का अल्ट्रासाउंड करने वाले डॉक्टर को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत, POCSO मामला रद्द