भिवानी के दिनोद गांव के जयभगवान ने वैवाहिक बंधन को एक लंबी, दर्दनाक कानूनी जंग में बदल दिया। पत्नी ने सोशल मीडिया पर लगातार डिजिटल उत्पीड़न किया, अवास्तविक आरोपों के साथ झूठे केस दायर कर उनकी मनोवैज्ञानिक स्थिरता को तोड़ने की कोशिश की। इन सबके बीच, जिला अदालत ने अंततः तलाक का आदेश दिया, जिससे दोनों के बीच का रिश्ता आधा-आधा रह गया। तलाक के बाद, जयभगवान ने अपने सपने—एक घर बनाकर परिवार को स्थिरता देना—भुला दिया। अब वह अदालत के आदेशों और सामाजिक अंधविश्वासों के बीच फंसा है, जबकि डिजिटल दुष्प्रचार की लहरें लगातार उसे परेशान करती हैं। यह मामला दिखाता है कि कैसे झूठे मुकदमों और ऑनलाइन दुरुपयोग से व्यक्तिगत जीवन पर गहरा असर पड़ता है, और सामाजिक संवाद में संवेदनशीलता की कितनी ज़रूरत है।

By AIAdmin