भारतीय रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले छह पैसे कमजोर होकर 95.28 के स्तर पर पहुंच गया। मुद्रा बाजार में गिरावट के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड प्रमुख कारण रहे। आयातकों की ओर से डॉलर की बढ़ी मांग ने भी रुपये पर दबाव डाला। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने रुपये की कमजोरी को और बढ़ाया। भू-राजनीतिक तनावों के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार तेल कीमतों में तेजी से भारत के आयात बिल पर असर पड़ सकता है। घरेलू शेयर बाजार में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर देखने को मिला। विदेशी निवेशकों ने बाजार में शुद्ध बिक्री दर्ज की। डॉलर की मजबूती के कारण उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव बना हुआ है। बाजार की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतों और तेल कीमतों की दिशा पर रहेगी। Source: Source Post navigation UPI इस्तेमाल करने पर ग्राहकों को नहीं देना होगा चार्ज, MDR पर वित्त मंत्री ने दी सफाई नोएडा में प्रॉपर्टी बाजार में जबरदस्त तेजी, 7 साल में घरों की कीमतें 111% बढ़ीं