भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि तलाक की निंदा के डर से महिलाएं अपने जीवन को खतरे में डाल रही हैं। यह डर उन्हें ऐसे रिश्तों में बने रहने के लिए मजबूर कर रहा है जो उनके लिए हानिकारक हो सकते हैं। न्यायालय के अनुसार, तलाक को लेकर समाज में एक गलत धारणा है। लोग तलाक को अपराध मानते हैं और इसे सामाजिक अपमान के रूप में देखते हैं। इस reason से, महिलाएं अपने पति के साथ रहती हैं और अपने अधिकारों की अनदेखी कर देती हैं। न्यायालय ने कहा कि तलाक کो लेकर महिलाओं को जागरूक किया जाना चाहिए। उन्हें अपने अधिकारों के बारे में पता होना चाहिए और वे अपने फैसले खुद ले सकती हैं। न्यायालय का यह भी कहना है कि तलाक को एक अपराध के रूप में नहीं देखना चाहिए। इसके अलावा, न्यायालय ने महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जागरूक करने के लिए काम करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। Source: Source Post navigation बेटी ने 90 वर्षीय सास को पीठ पर लादकर 4 किमी पैदल चलकर किया केवाईसी भारत 114 राफेल विमानों की डील के करीब