मध्यप्रदेश के रीवा में जैन साध्वियों के साथ हुई सड़क दुर्घटना के बाद जैन समाज में गहरा शोक और आक्रोश है। समाजजनों ने इस घटना को संत परंपरा पर गंभीर आघात बताते हुए दोषी वाहन चालक के खिलाफ कठोर कार्रवाई व ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने की मांग उठाई है। जानकारी के अनुसार सड़क विहार के दौरान तेज रफ्तार आल्टो कार ने आर्यिका श्री 105 उपशममति माताजी और आर्यिका श्री 105 श्रुतमति माताजी को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों आर्यिकाओं की समाधि हो गई। नवापारा-राजिम क्षेत्र के समाजजनों ने इस हादसे को दुखद बताते हुए पदविहारी संत-साध्वियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। बताया गया कि आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज की आज्ञानुवर्ती आर्यिका संघ पंचतीर्थ यात्रा के दौरान विहार करते हुए रीवा पहुंचा था। तभी बुधवार सुबह यह हादसा हुआ। आर्यिका श्री श्रुतमति माताजी की घटनास्थल पर ही समाधि हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल आर्यिका श्री उपशममति माताजी ने संत निवास में णमोकार मंत्र श्रवण करते हुए शांतिपूर्वक देह त्याग दिया। घटना के बाद रायपुर और नवापारा-राजिम से बड़ी संख्या में श्रद्धालु रीवा पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी संत निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की। पुलिस ने आरोपी वाहन चालक को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है। इधर, राष्ट्रसंत सुधा सागर महाराज और प्रमाण सागर महाराज के संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। संतों ने दिगम्बर और श्वेताम्बर समाज से मतभेद भूलाकर संत परंपरा की सुरक्षा के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। इसी कड़ी में 25 मई को देशव्यापी मौन प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान तहसीलदार, कलेक्टर, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर ‘संत सुरक्षा नीति’ लागू करने, पदविहारी संत-साध्वियों के लिए सुरक्षित मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी। : Source Post navigation पहली बार ट्रेन में बैठे 1500 आदिवासी:आजादी के 75 साल बाद रेल की खिड़की से देखी दुनिया, दुर्ग स्टेशन पर तिलक-आरती से स्वागत; दिल्ली के जनजातीय गरिमा उत्सव में होंगे शामिल