दिल्ली में CJP समर्थकों के संसद की ओर बढ़ने के दौरान झड़पें हुईं और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। इस घटना ने राजधानी में पिछले वर्षों के बड़े विरोध प्रदर्शनों की याद ताजा कर दी। दिल्ली लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों का केंद्र रही है। वर्ष 2021 की ट्रैक्टर रैली ने किसान आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया था। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन ने भी राजधानी में बड़े पैमाने पर जनभागीदारी देखी थी। निर्भया कांड के बाद हुए प्रदर्शन देशभर में आक्रोश और बदलाव की मांग का प्रतीक बने थे। नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हुए आंदोलन ने भी दिल्ली में व्यापक प्रदर्शन देखे थे। वर्ष 2023 में पहलवानों ने भी संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं से दिल्ली में विरोध और लोकतांत्रिक आवाज उठाने की परंपरा सामने आती है। हालिया CJP प्रदर्शन को भी राजधानी के इसी आंदोलनकारी इतिहास के संदर्भ में देखा जा रहा है। Source: Source Post navigation जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद CJP नेता सौरभ दास बोले- नहीं मिला ठोस आश्वासन, नड्डा ने धरना खत्म करने की अपील की जंतर-मंतर कार्रवाई के विरोध में हिसार कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग