दिल्ली सरकार के ‘मंडे मेट्रो डे’ अभियान का राजधानी में मिला-जुला असर देखने को मिला. कुछ अधिकारी और मंत्री मेट्रो और फीडर बस से सचिवालय पहुंचे, लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारी निजी वाहनों से ही आए. सरकार ने इसे स्वैच्छिक पहल बताया और कहा कि लोगों की अपनी मजबूरियां भी हो सकती हैं.

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