मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने दुष्कर्म और एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों में मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मुआवजा पाने के लिए पीड़िता को शपथ पत्र देना होगा। शपथ पत्र में अपने बयान और दावे की पुष्टि करना अनिवार्य होगा। यदि बाद में पीड़िता बिना उचित कारण अपने बयान से मुकरती है, तो उसे मिली पूरी सहायता राशि लौटानी पड़ सकती है। हाईकोर्ट का उद्देश्य मुआवजा व्यवस्था के दुरुपयोग को रोकना बताया गया है। अदालत ने कहा कि वास्तविक पीड़ितों को समय पर न्याय और सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखना भी आवश्यक है। आदेश में जांच और मुकदमे की पारदर्शिता पर भी जोर दिया गया। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इस फैसले का असर भविष्य में दर्ज होने वाले ऐसे मामलों पर भी पड़ सकता है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार आदेश का उद्देश्य झूठे दावों पर रोक लगाना और वास्तविक पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना है। मामले में आगे की कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार की जाएगी। Source: Source Post navigation जबलपुर-भोपाल NH के क्षतिग्रस्त पुल पर हाईकोर्ट सख्त, मरम्मत में देरी पर MPRDC और रेलवे से मांगा जवाब खान सर को अग्रिम जमानत मामले में राहत, 30 जून तक गिरफ्तारी पर रोक कायम