नालंदा जिले के निगरानी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई में 90,000 रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए दरोगा वीरेंद्र कुमार को गिरफ़्तार किया। जांच से पता चला कि कुमार ने एक प्रतिष्ठित डॉक्टर को झूठे केस में फँसाया और उससे बड़ी रकम निकालने की कोशिश की। फार्मेसी लाइसेंस में बदलाव और अनधिकृत दवा बिक्री के झूठे आरोपों से डॉक्टर को भ्रामित करके, कुमार ने उनसे जबरदस्ती भुगतान करवाया। पुलिस ने इस घोटाले की विस्तृत जांच शुरू की और सम्बंधित दस्तावेज़ व बैंक ट्रांज़ैक्शन की बरामदगी की। इस घटना ने पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ कड़े कदम उठाने का संकेत दिया है। अब आरोपी दरोगा पर दिये गये आरोपों की अदालत में सुनवाई होगी, जबकि डॉक्टर को उनके नाम पर लगे झूठे केसों से मुक्त किया गया है। Post navigation क्रूसिबल का दबाव: ड्राइविंग टेस्ट से 50 गुना अधिक ग्वालियर तलाक केस: ननद को ‘दूसरी पत्नी’ बताकर मिला तलाक, अब हाईकोर्ट में चल रही कहानी