नुआपाड़ा जिले के प्रतिष्ठित भाषाविद्, साहित्यकार और शिक्षक डॉ. महेंद्र मिश्र को देश का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री प्रदान किया गया है। सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें यह सम्मान दिया। डॉ. मिश्र को यह सम्मान भाषा, आदिवासी संस्कृति, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है। उन्होंने अपना पूरा जीवन आदिवासी समुदायों की लुप्त होती भाषाओं और परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित कर दिया। कई दशकों के शोध और अध्यापन के दौरान उन्होंने आदिवासी बोलियों का व्यापक दस्तावेजीकरण किया है। डॉ. मिश्र ने आदिवासी लोक साहित्य, कला और संस्कृति को मुख्यधारा में लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उनकी पुस्तकें और शोध-पत्र साहित्य जगत में बेहद सम्मानित हैं। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने सैकड़ों छात्रों को आदिवासी भाषाओं और संस्कृति के प्रति संवेदनशील बनाया। पद्मश्री सम्मान उनके जीवन भर के त्याग और समर्पण की सार्थक पहचान है। यह उपलब्धि न केवल उनके लिए बल्कि पूरे नुआपाड़ा जिले के लिए गर्व की बात है। डॉ. मिश्र ने इस सम्मान को अपने क्षेत्र की आदिवासी आवाज़ों को सम्मान माना है। उनके कार्य ने यह सिद्ध किया है कि स्थानीय भाषाएं और जनजातीय परम्पराएं राष्ट्र की धरोहर हैं। इस मौके पर उनके चाहने वालों और शिक्षा जगत ने उन्हें बधाई दी। Source: Source Post navigation जांजगीर के शासकीय कॉलेज के 4 एनसीसी कैडेटों का अग्निवीर भर्ती में हुआ चयन, दो अलग-अलग पदों पर मिली सफलता अमलीपदर में जनगणना कार्य का निरीक्षण: अपर कलेक्टर व अन्य अधिकारियों ने घर-घर जाकर परखी गुणवत्ता, नागरिकों से सटीक जानकारी देने की अपील