महाराष्ट्र के ठाणे जिले के शाहपुर की एक आदिवासी बस्ती में बुनियादी सुविधाओं की कमी का मामला सामने आया है। उंभरई गांव में श्मशान भूमि नहीं होने के कारण खुले मैदान में अंतिम संस्कार करना पड़ा। ग्राम पंचायत समिति की सदस्य जयाबाई महादू वाघ के निधन के बाद यह स्थिति सामने आई। अंतिम संस्कार के दौरान तेज बारिश हो रही थी। बारिश से बचने के लिए लोगों को चारों ओर तिरपाल पकड़कर खड़ा होना पड़ा। खुले मैदान में अंतिम संस्कार की व्यवस्था ग्रामीणों के लिए मुश्किल भरी रही। गांव में श्मशान के अभाव ने स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए भी उचित स्थान उपलब्ध नहीं है। बारिश के मौसम में यह समस्या और गंभीर हो जाती है। गांव तक बेहतर सड़क और श्मशान भूमि जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत महसूस की जा रही है। जयाबाई महादू वाघ के अंतिम संस्कार के दौरान सामने आई तस्वीरों ने गांव की स्थिति को उजागर किया है। स्थानीय लोगों के सामने लंबे समय से चली आ रही सुविधाओं की कमी का मुद्दा फिर चर्चा में आया है। Source: Source Post navigation नहरी पानी की मांगों को लेकर जल संघर्ष समिति ने अधिकारियों से की बैठक, किसानों की समस्याओं पर चर्चा बाढ़ में ‘हनुमान रथ’ बनेगा सहारा, 3 करोड़ की हाईटेक रेस्क्यू गाड़ी पानी पर करेगी राहत कार्य