पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर हाईकमान की बैठकों का दौर पूरा हो गया है। पार्टी नेतृत्व जल्द ही इस मुद्दे पर बड़ा फैसला ले सकता है। सांसद मनीष तिवारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उनसे इस विषय पर राय नहीं ली गई। उन्होंने कहा कि पंजाब के कई नेताओं को दिल्ली बुलाया गया, लेकिन उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। तिवारी का मानना है कि चुनाव से पहले नेतृत्व बदलना उचित नहीं होगा। उनके अनुसार किसी भी प्रदेश अध्यक्ष को परिणाम देने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए। कांग्रेस हाईकमान द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों ने पंजाब के वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया है। इस रिपोर्ट को पार्टी नेतृत्व को सौंप दिया गया है। राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने संभावित दावेदारों से अलग-अलग मुलाकात की है। प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई वरिष्ठ नेताओं के नाम चर्चा में हैं। पार्टी नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे। पंजाब कांग्रेस में जाट सिख और दलित प्रतिनिधित्व को लेकर भी बहस जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने संगठन में संतुलित प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया था। हालिया चुनावी प्रदर्शन के बाद वर्तमान नेतृत्व पर सवाल भी उठे हैं। इन सभी घटनाक्रमों के बीच कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व पंजाब इकाई के भविष्य को लेकर अहम निर्णय लेने की तैयारी में है। Source: Source Post navigation राजस्थान में ‘ऑपरेशन क्लीन’ पर सियासी घमासान, गहलोत ने धार्मिक स्थलों पर कार्रवाई पर उठाए सवाल धर्मस्थल शपथ योजना से पीछे हटी कर्नाटक भाजपा, क्रॉस वोटिंग करने वालों की पहचान के लिए बनाई जांच समिति