तुर्की का KAAN लड़ाकू विमान कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसके प्रोटोटाइप का परीक्षण जारी है और भविष्य में डिलीवरी की योजना बनाई गई है। इसके मुकाबले भारत के AMCA कार्यक्रम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। AMCA के इंजन चयन में देरी इसके विकास को प्रभावित कर रही है। भारत को स्टील्थ सामग्री के विकास में भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। तुर्की ने कई प्रोटोटाइप के जरिए विकास प्रक्रिया को तेज करने की रणनीति अपनाई है। इससे KAAN के परीक्षण और विकास की समयसीमा काफी कम हो सकती है। भारत के AMCA की पहली उड़ान 2030 के दशक की शुरुआत से पहले होने की संभावना कम बताई जा रही है। इससे दोनों देशों के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रमों के बीच अंतर बढ़ सकता है। तुर्की की तेज प्रगति उसे इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण बढ़त दिला सकती है। भारत की देरी उसके भविष्य की पांचवीं पीढ़ी की लड़ाकू विमान क्षमता को प्रभावित कर सकती है। Source: Source Post navigation UPSC टॉपिक: अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय क्या है और वेनेजुएला ने इससे दूरी क्यों बनाई? नेतन्याहू ने PM मोदी को फोन कर जताया आभार, कहा- Thank you my friend; भारत-इजराइल रिश्तों पर हुई बात