क्रेडाई (CREDAI) कर्नाटक ने राज्य में रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए सरकारी मंजूरियों में हो रही देरी पर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि ‘लालफीताशाही’ (red tape) के कारण प्रोजेक्ट्स पाइपलाइन में फंस जाते हैं, जिससे न केवल निर्माण कार्य की लागत बढ़ती है बल्कि खरीदारों को भी नुकसान उठाना पड़ता है। क्रेडाई ने सरकार से सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने और मंजूरियों की प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया है। उनका मानना है कि त्वरित मंजूरी मिलने से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि आवास की उपलब्धता में भी सुधार होगा। क्रेडाई प्रतिनिधियों ने प्रशासन के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करने और एक पारदर्शी प्रक्रिया विकसित करने की बात कही है। इस पहल का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में व्याप्त बाधाओं को दूर कर विकास की गति को तेज करना है। Source: Source Post navigation भारत के ऑफिस स्पेस में बढ़ा निवेश, तैयार कार्यस्थलों पर निवेशकों का बढ़ा भरोसा अहमदाबाद-मेहसाणा कॉरिडोर में घोड़ा प्रजनन व्यवसाय में तेज उछाल, संख्या 2 हजार से बढ़कर 4 हजार हुई