आचार्य चाणक्य का कहना था कि जिस प्रकार जल के प्रवाह का संचय अच्छा नहीं होता है. वह सदा बहता और बंटता रहता है. उसी प्रकार संचित किए गए धन का भी सही समय पर खर्च या उपयोग होना जरूरी है. उसे तिजोरी में जमा करके रखने से उसका महत्व और मूल्य दोनों कम हो जाते हैं. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation तलाक के बाद बेटी की परवरिश करने में छूटे एक्टर के पसीने अमेरिका से जमीनी लड़ाई की तैयारी में ईरान, IRGC ने जारी किया ट्रेनिंग वीडियो