बिलासपुर हाईकोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को शिकायतों की जांच कर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मामला पूर्व में जारी न्यायालयीन आदेशों के पालन न होने से जुड़ी अवमानना याचिका के रूप में सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि फर्जी जाति प्रमाणपत्रों की जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर दिया। अदालत ने राज्य सरकार को चार महीने के भीतर सभी संबंधित शिकायतों की जांच पूरी करने को कहा है। जांच के बाद उचित कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को संबंधित विभागीय अधिकारी के समक्ष नया अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी। अधिकारियों को शिकायतों पर गंभीरता से विचार करने के लिए कहा गया है। यह मामला सरकारी नौकरियों और अन्य लाभों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा माना जा रहा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पात्रता से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक है। फैसले के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। अब सभी की नजर जांच प्रक्रिया और सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर रहेगी।

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