बिलासपुर में 11 केवी हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से दो मजदूरों की मौत के एक दिन बाद नगर निगम ने कार्रवाई की। निगम की टीम हाईटेंशन लाइन के पास बने कथित अवैध निर्माण को हटाने पहुंची। कार्रवाई के दौरान मकान मालिक और निगम अधिकारियों के बीच जमकर विवाद हुआ। मकान मालिक ने दावा किया कि भवन का नक्शा स्वीकृत होने के बाद उसे अवैध निर्माण को लेकर कोई नोटिस नहीं दिया गया। वहीं निगम ने कहा कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया था। निगम के अनुसार, मकान मालिक को 9 अप्रैल और 13 मई 2026 को निर्माण रोकने के नोटिस दिए गए थे। इसके बावजूद निर्माण जारी रहने का आरोप है। निगम ने बुलडोजर से मकान के सामने करीब 9 फीट के अतिरिक्त निर्माण को तोड़ दिया। अधिकारियों के मुताबिक स्वीकृत नक्शे में भवन के चारों तरफ निर्धारित खुली जगह छोड़ना जरूरी था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि समय रहते निर्माण रुकवा दिया जाता तो मजदूरों की जान बच सकती थी। पुलिस अब मकान मालिक, ठेकेदार और निर्माण से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। हादसे में मृत दोनों मजदूरों के पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए। स्थानीय लोगों ने मकान मालिक के एक भाजपा नेता के करीबी होने का भी आरोप लगाया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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