पूर्वी चंपारण जिले के सुगौली अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। अस्पताल में फ्रैक्चर के मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त चिकित्सा उपकरण और प्लास्टर सामग्री का अभाव देखा गया। स्थिति इतनी गंभीर है कि मरीजों के अंगों को सहारा देने के लिए अस्पताल प्रशासन ने कार्टून के डिब्बों का उपयोग किया है। सोहराब आलम की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे बेहतर सुविधाओं के दावों की पोल इस घटना ने खोल दी है। मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल की लचर व्यवस्था पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। अस्पताल में मूलभूत संसाधनों की कमी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यह मामला जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र होने के बावजूद मरीजों को इस तरह की दयनीय स्थिति में इलाज मिलना चिंताजनक है। स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। अस्पताल प्रबंधन अभी तक इस गंभीर लापरवाही पर कोई स्पष्ट जवाब देने में विफल रहा है। सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर कार्टून का इस्तेमाल करना प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है। उम्मीद है कि इस खुलासे के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना राज्य के दूरदराज इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत को बयां करती है।

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