भारतीय अदालतों में पारदर्शिता का स्तर मध्यम है, लेकिन कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार की जरूरत बनी हुई है। न्यायिक पारदर्शिता सूचकांक में अलग-अलग अदालतों और कार्यों के बीच प्रगति असमान पाई गई है। आम लोगों के लिए अदालती कार्यवाही तक पहुंच अभी भी कई जगह सीमित है। वर्चुअल सुनवाई में भी सार्वजनिक पहुंच को लेकर एकरूपता नहीं है। मुकदमों के आवंटन की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता से जुड़े सवाल बने हुए हैं। न्यायिक नियुक्तियों और तबादलों से जुड़े फैसलों में भी पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अदालतों में पारदर्शिता मजबूत करने के लिए संस्थागत नीतियों की जरूरत है। आम नागरिकों के लिए सार्वजनिक पहुंच से जुड़े स्पष्ट दिशानिर्देश भी तैयार किए जाने चाहिए। अदालती प्रक्रियाओं की जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने से जवाबदेही बढ़ सकती है। पारदर्शिता से न्यायपालिका में जनता का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी। अलग-अलग अदालतों में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं में एकरूपता लाना भी जरूरी है। न्यायिक संस्थानों में अधिक खुलापन न्याय तक सार्वजनिक पहुंच को बेहतर बना सकता है।

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