भारत अब छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के विकास कार्यक्रमों में भागीदारी की दिशा में सक्रिय कदम उठा रहा है। देश की रणनीति है कि इन उन्नत तकनीकों को पूरी तरह से नए सिरे से विकसित करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए आगे बढ़ा जाए। यह कदम चीन और अमेरिका जैसे देशों में तेज़ी से हो रहे सैन्य तकनीकी विकास के बीच उठाया गया है। भारतीय वायुसेना (IAF) यूरोप के FCAS और GCAP जैसे प्रमुख प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन कर रही है। इन कार्यक्रमों के तहत आने वाले वर्षों में प्रोटोटाइप विमान तैयार होने की संभावना है। भारत का उद्देश्य आधुनिक हवाई युद्ध क्षमताओं को मजबूत करना और भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए तैयार रहना है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह सहयोग भारत की रक्षा तकनीक में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। इससे देश को उन्नत एयरोस्पेस तकनीक तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। यह पहल भारत की रणनीतिक साझेदारी नीति को भी मजबूत करती है। आने वाले समय में इस दिशा में औपचारिक समझौते होने की संभावना है। Source: Source Post navigation मनजिंदर सिंह बिट्टा का करनाल दौरा, बोले- देश में आतंकवाद और नक्सलवाद पर कड़ी लगाम लगी है वाइस एडमिरल अजय कोचर ने भारतीय नौसेना के 48वें वाइस चीफ का पद संभाला, ऑपरेशन सिंदूर में रह चुके हैं रणनीतिक भूमिका में