भारत में स्वदेशी MRI मशीन विकसित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है। बेंगलुरु की एक छोटी कंपनी ने नई तकनीक के आधार पर यह मशीन तैयार की है। इस स्वदेशी MRI तकनीक से लागत में करीब 70 फीसदी तक कमी आने की उम्मीद है। इसे देश में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाओं की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस परियोजना को आगे बढ़ाने में टाटा ट्रस्ट के सहयोग की अहम भूमिका बताई जा रही है। इसके अलावा जोहो के श्रीधर वेम्बू के योगदान का भी उल्लेख किया जा रहा है। स्वदेशी तकनीक विकसित करने का उद्देश्य महंगी चिकित्सा मशीनों पर निर्भरता कम करना है। MRI जैसी उन्नत जांच सुविधा को अधिक लोगों तक पहुंचाने में यह पहल मददगार हो सकती है। भारतीय इंजीनियरों और स्टार्टअप्स की तकनीकी क्षमता का यह एक उदाहरण माना जा रहा है। इस उपलब्धि से स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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