रूस-यूक्रेन युद्ध और होर्मुज संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिला, लेकिन भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश जारी रखी. केंद्र सरकार ने कई बार एक्साइज ड्यूटी घटाकर उपभोक्ताओं को राहत दी, जबकि तेल कंपनियों ने भी नुकसान उठाया. हालांकि मई 2026 में करीब चार साल बाद ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिसके पीछे वैश्विक तेल संकट और मिडिल ईस्ट तनाव को वजह बताया गया. 🔗 Read original source — Aaj Tak [RAW] Post navigation शेखर टुनाइट: शेखर सुमन के साथ लौटा राजनीतिक व्यंग्य का खोया हुआ अंदाज बंद होने जा रहा है Aadhaar App, तुंरत कर लें ये काम, वर्ना होगी मुश्किल