मुजफ्फरपुर में इम्तियाज और नाजमा का निकाह खास मिसाल बन गया है। इम्तियाज पैर से दिव्यांग हैं और बचपन से ही शारीरिक चुनौती का सामना करते रहे हैं। उन्होंने अपनी परिस्थितियों को कमजोरी नहीं बनने दिया। इम्तियाज ने जयपुर जाकर मोबाइल रिपेयरिंग का काम सीखा। इसके बाद उन्होंने अपनी दुकान शुरू की और आत्मनिर्भर बने। दूसरी ओर नाजमा बोल नहीं पाती हैं। इम्तियाज ने नाजमा को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुना। दोनों ने अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद साथ जीवन बिताने का फैसला किया। उनका निकाह सामाजिक और व्यक्तिगत दृढ़ता की मिसाल बनकर सामने आया है। दोनों ने साबित किया कि शारीरिक अक्षमता किसी व्यक्ति के सपनों और रिश्तों में बाधा नहीं बननी चाहिए। इम्तियाज की मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश प्रेरणादायक है। नाजमा के साथ उनका रिश्ता स्वीकार्यता और आपसी विश्वास का उदाहरण पेश करता है। Source: Source Post navigation गुजरात की अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी, अहमदाबाद-सूरत में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर रील बनाने के चक्कर में 30 फीट से लगाई छलांग, पानी की जगह चट्टान से टकराया युवक