वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी, मोहिनी एकादशी, इस वर्ष 27 अप्रैल, सोमवार को आती है। इस पावन दिन को भगवान विष्णु की कृपा से पापों की क्षमा और मन, शरीर व आत्मा की शुद्धि का अवसर माना जाता है। व्रती लोग पूरे दिन उपवास रखते हुए दोपहर में आकर्षी वसूली के साथ काज्य (दुर्घटना) से बचने के लिए शंका-रहित मुहूर्त चुनते हैं। पूजा का शुभ मुहूर्त श्वा (सुबह 07:30‑08:00) और द्वारसाकाल (16:00‑16:30) के बीच है, जिसके दौरान मोती, चंदन, तुलसी और कच्चा नारियल अर्पित कर स्नान कर व्रत खोलना चाहिये। इस दिन संडे में गंगाजल स्नान, विष्णु रूप में शरदाष्टमी के साथ योग-ध्यान करने से लाभप्राप्ति अधिक होती है। मुख्य अनुष्ठान में मोहरि श्याल (शेर) की कथा, मोती व दाल के साथ प्रसाद और भजन का विशेष महत्व है। व्रत रखन वाले यदि कथा, शुद्ध शंख, और शुक्रमित जड़ियों का प्रयोग करें तो मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। Post navigation विश्व तेंदुआ दिवस पर पन्ना के इदरीश की जान बची, वन विभाग की ‘देसी जुगाड़’ ने किया करिश्मा पिहोवा में धूमधाम: मुख्यमंत्री भगवंत मान और ससुराल परिवार ने बिताए यादगार पलों का आनंद