इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज औतार सिंह को उत्तर प्रदेश के पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह चुनाव समाज की दलित और पिछड़े वर्गों के मतदाकर्षण में लगभग 12% महत्व है। अतार सिंह ने यह दुत्ता लिखा कि, “यह आयोग प्रशस्त बाध्यता प्रदान करेगा और विश्वसनीय सीटों के विभाजन में मदद करेगा।” उत्तर प्रदेश विधायी सभा की सरकार ने इस आयोग का गठन 2023 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों के लिए किया है। अतार सिंह की नियुक्ति से दिखाया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने विधायी सभा चुनावों में जल्दी-जल्दी आम लोगों को निहित करने में बहुत रुचि है। उनका इस चुनाव काफ़ी महत्वपूर्ण है क्योंकि दलित और पिछड़े वर्गों के निर्माण में समाज का प्रभाव अधिक पता चलता है। यह आयोग उत्तर प्रदेश राज्य के संविधान में दलित और पिछड़े वर्गों के लिए अनुपार्थी संस्थानों की आरक्षण शामिल करता है। इस प्रक्रिया में, आयोग ओबीसी वर्गों के लिए सही सीटों को निर्धारित करने की जिम्मेदारी है। इतनी महत्वपूर्ण कल्पना के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार ने यहाँ पर आयोग के अध्यक्ष की कुशलता और विश्वसनीयता पर बहुत ध्यान दिया है। इस आयोग के लिए अच्छे अध्यक्ष तोड़ कर चुनाव में शामिल हो सकते हैं, लेकिन 10 और उत्तर प्रदेश राज्य की इमारत का अध्यक्ष व्यवस्था में दिखने की संभावना है। 2023 के उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों में अध्यक्ष की मदद से ओबीसी वर्गों के निर्माण में महत्वपूर्ण छलका है। आयोग पर हमारी ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि इसमें दलित और पिछड़े वर्गों की उपहत्ता हो रही है या नहीं। यह चुनाव और प्रतिनिधित्व की महत्वता को दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार अपने गठबंधनों और आयोगों में बहुमूल्य विश्वसनीयता के लिए प्रतिबिम्बित है। इस संबंध में, हमारे ध्यान हटा देना चाहिए कि क्या उत्तर प्रदेश विधायी सभा की सरकार इस आयोग और इसके अध्यक्ष ने कैसे गठबंधन को मजबूत किया है। 🔗 Read original source — Aaj Tak Post navigation 26 दिन में फलता में हुए दो चुनाव के बीच बंगाल कितना बदल चुका है? मेलोडी इतनी सफल डिप्लोमाटिक कैसे बनी?