भारतीय नौसेना ने राफेल मरीन लड़ाकू विमानों के समुद्री उपयोग से जुड़े उड़ान परीक्षण गोवा में शुरू कर दिए हैं। इन विमानों को भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर तैनात करने की योजना है। राफेल मरीन को समुद्र में सैन्य अभियानों और विमानवाहक पोत से संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है। इन परीक्षणों का उद्देश्य विमान की परिचालन क्षमताओं और समुद्री परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन का आकलन करना है। भारत ने वर्ष 2025 में 26 राफेल मरीन विमानों की खरीद के लिए समझौता किया था। इस सौदे के तहत भारतीय नौसेना को नए लड़ाकू विमान मिलने हैं। विमानों की आपूर्ति वर्ष 2028-29 से शुरू होने की उम्मीद है। इनकी तैनाती से आईएनएस विक्रांत की हवाई युद्ध क्षमता को मजबूती मिलने की संभावना है। राफेल मरीन विमान समुद्र में दुश्मन के लक्ष्यों के खिलाफ अभियान चलाने और नौसैनिक सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। गोवा में चल रहे परीक्षण विमान को भारतीय नौसेना की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस परियोजना से विमानवाहक पोत आधारित लड़ाकू विमान संचालन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। हालांकि, परीक्षणों के विस्तृत परिणामों की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है। विमानों की वास्तविक तैनाती और परिचालन क्षमता उनकी आपूर्ति तथा आवश्यक परीक्षणों के पूरा होने पर निर्भर करेगी। Source: Source Post navigation टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में बेगूसराय का ऋतिक गिरफ्तार, परिजनों ने पहचानने से किया इनकार जालंधर कैंट स्टेशन पर CTI ने ढूंढा महिला का नकदी भरा बैग, ₹1.20 लाख और लैपटॉप समेत सामान सुरक्षित लौटाया