लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की एक रिपोर्ट में चीन की समुद्री रणनीति को लेकर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार चीन की कमजोरी केवल मलक्का जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह होर्मुज जलडमरूमध्य से भी जुड़ी हुई है। ऊर्जा आपूर्ति के लिए चीन की बढ़ती निर्भरता ने हिंद महासागर क्षेत्र को उसकी रणनीतिक प्राथमिकताओं में और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। इस स्थिति के कारण क्षेत्रीय भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। रिपोर्ट में भारत, अमेरिका और फ्रांस की बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। इन देशों की समुद्री उपस्थिति चीन की रणनीतिक चुनौतियों को प्रभावित कर सकती है। हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और प्रभाव को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ती दिख रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्थिति वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकती है। रिपोर्ट में ऊर्जा आपूर्ति मार्गों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया गया है। यह विश्लेषण अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक हालात को नए नजरिए से प्रस्तुत करता है। Source: Source Post navigation टिबोर गैंटी: वह भूले-बिसरे वैज्ञानिक जिन्होंने आधुनिक जीवविज्ञान से पहले ही जीवन की संरचना को समझाया इज़रायल का दक्षिणी लेबनान में बड़ा सैन्य अभियान, हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर भीषण हमले