गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक महिला को बिना उचित सूचना और आदेश को चुनौती देने का मौका दिए बांग्लादेश भेजे जाने के मामले में मुआवजे का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि विदेशी घोषित किए गए लोगों को हिरासत में लेने से पहले संबंधित फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की राय उपलब्ध कराई जानी चाहिए। मामले में मुमताज बेगम को ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद बांग्लादेश भेज दिया गया था। अदालत के समक्ष उनकी निर्वासन प्रक्रिया और कानूनी अधिकारों से जुड़ा मामला उठाया गया। महिला को आदेश के खिलाफ प्रभावी तरीके से चुनौती देने का अवसर नहीं मिलने पर अदालत ने चिंता जताई। हाईकोर्ट ने गलत निर्वासन के मामले में उनके परिवार को राहत देने का निर्देश दिया है। उनके पति को पहले ही अंतरिम मुआवजा दिए जाने की जानकारी अदालत के सामने रखी गई। अदालत ने अधिकारियों को परिवार के सदस्यों को निर्वासन और संबंधित आदेशों की जानकारी देने का निर्देश दिया। फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल की राय की मुफ्त प्रति उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया। अदालत के निर्देश का उद्देश्य प्रभावित व्यक्ति को कानूनी उपाय अपनाने का उचित अवसर देना है। हाईकोर्ट ने हिरासत और निर्वासन की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने पर जोर दिया। मामले में ₹2 लाख मुआवजे का आदेश महिला के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Source: Source